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May 06, 2020, 19:20 IST

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पूर्णिमा और अमावस्या दोनों का बेहद खास महत्व है। ये दोनों रातें खास साधनाओं के लिए अति उत्तम होती हैं। हिंदू महीने बैशाख में पूर्णिमा के दिन भगवान बुद्ध का जन्म हुआ था। इस दिन को बुध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। इस साल यह पूर्णिमा 7 मई को पड़ रही है। ऐसी भी मान्यता है कि इसी दिन बुद्ध को बोधि वृक्ष के नीचे ज्ञान की प्राप्ति भी हुई थी।

क्यों खास है इस साल की बुद्ध पूर्णिमा?

इस बार की पूर्णिमा इसलिए खास है क्योंकि इस दिन साल का आखिरी सुपरमून नजर आने वाला है। इस दिन चांद बाकी दिनों से ज्यादा बड़ा और चमकीला दिखाई देगा। इस साल 7 मई को आप सुपर मून को देख सकेंगे और इसके बाद अगले साल 27 अप्रैल को ही इसका नजारा देख पाएंगे। इस सुपरमून को सुपर फ्लावर मून भी कहा जाता है।

नासा की वेबसाइट के मुताबिक, सुपर फ्लावर मून भारत में गुरुवार 7 मई की शाम 4 बजकर 14 मिनट से अपने चरम पर होगा और पूरी तरह चमक रहा होगा। इस समय पृथ्वी चांद के बेहद नजदीक होगी।



यह दिन खास है लेकिन भारत के लोग इस घटना के प्रत्यक्षदर्शी नहीं बन पाएंगे क्योंकि यह भारत में दोपहर बाद का होगा। यदि आप इस घटना को देखना चाहते हैं तो ऑनलाइन इस शानदार नजारे को देख सकते हैं।

यह तो थी खगोलीय घटना लेकिन इस पूर्णिमा के महत्व के अनुसार शुभ मुहूर्त जरूर जानिए क्योंकि इस दिन की जाने वाली पूजा पुण्य प्रदान करती है।

बुद्ध पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त

पूर्णिमा तिथि प्रारंभ: 6 मई 2020 को शाम 7 बजकर 44 मिनट से

पूर्णिमा तिथि समाप्‍त: 7 मई 2020 को शाम 04 बजकर 14 मिनट तक

कैसे करें पूजा?

- सूर्य उदय से पहले उठकर घर की साफ सफाई के बाद स्नान करें।

- स्नान करने के पानी में गंगाजल डाल लें। ऐसा इसलिए क्योंकि इस दिन गंगा स्नान करने का महत्व है लेकिन लॉकडाउन में घर से बाहर ना जाने के कारण घर पर ही गंगा के जल से स्नान करें।

- घर के मंदिर में विष्णु जी की प्रतिमा के सामने दीपक जलाकर उनकी पूजा करें।

- शाम के वक्त उगते चांद को अर्घ्य दें।


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