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Jun 02, 2020, 20:28 IST

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गीता के उपदेश में स्वयं भगवान श्रीकृष्ण ने कहा था ‘यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत, अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्’


इसका अर्थ है


जब जब धर्म की हानि होती है, तब तब मैं आता हूं, जब जब अधर्म बढ़ता है, तब तब मैं आता हूं, सज्जन लोगों की रक्षा के लिए मै आता हूं, दुष्टों के विनाश करने के लिए मैं आता हूं, धर्म की स्थापना के लिए में आता हूं और मैं हर युग में जन्म लेता है..”


इस खूबसूरत कृष्ण भजन का गायन कर आप भी भगवान श्रीकृष्ण के साथ आध्यात्मिक रिश्ता कायम कर सकते हैं.. वे आपकी भी हर परेशानी हरने अवश्य आएंगे...


अशरण शरण भव भय हरण, आनन्द घन राधा वरम्॥

सिर मोर मुकुट विचित्र मणिमय, मकर कुण्डल धारिणम्।

वन माल ललित कपोल मृदु, अधरन मधुर मुरली धरम्॥

वृषुभान नंदिनी वामदिशि, शोभित सुभग सिहासनम्।



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