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Jul 14, 2020, 17:41 IST

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शनि को न्याय का देवता कहा गया है... ये अपनी दशा में मनुष्य को उसके कर्मों के अनुसार फल प्रदान करते हैं। शनि के प्रकोप से बचने का एकमात्र तरीका यही है कि जातक को अपने कर्मों पर ध्यान देना चाहिए। इस समय शनि वक्री होकर मकर राशि में गोचर कर रहे हैं और सितंबर के बाद वे मार्गी अवस्था में आएंगे। ज्योतिषशास्त्र के सिद्धांतों के अनुसार यह माना जाता है कि वक्री दशा में शनि शुभ फल प्रदान नहीं करते।


शनि की वक्री स्थिति में वे राशियां जिनपर पहले से ही शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या चल रही है, उन्हें अपेक्षाकृत ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ सकती है जैसे जॉब का नुकसान, कॅरियर में परेशानी आना, घर में पिता या पिता तुल्य किसी व्यक्ति से झगड़ा होना वहीं ऑफिस में बॉस या किसी वरिष्ठ ओहदे वाले व्यक्ति से मनमुटाव होना। इसके अलावा वक्री अवस्था में शनि जातकको पैरों का गंभीर रोग भी दे सकते हैं।




इस समय मकर, धनु,कुंभ ...इन तीनों राशियों के जातकों पर शनि साढ़ेसाती और मिथुन और तुला पर शनि की ढैय्या चल रही है..इसलिए इन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।


अगर आपका संबंध भी इन्हीं राशियों में से किसी एक से है तो हम आपको यही सलाह देंगे कि शनि के प्रकोप से स्वयं को बचाए रखने के लिए आपको कुछ उपाय अवश्य करने चाहिए।


इस समय 12 में से 5 राशियां शनि के प्रभाव में है...उन्हें शनि को शांत करने के उपाय अवश्य करने चाहिए.. जिसमें सबसे प्रभावी है हनुमत आराधना। ये वो रामबाण है जो जातक को सहजता के साथ शनि के प्रकोप से बचा सकता है।

मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा और सुंदर कांड का पाठ, नियमित तौर पर हनुमानाष्टक और बजरंग बाण पढ़ने से शनि का प्रकोप कम होता है। लगातार 5 मंगलवार हनुमान मंदिर जाकर हनुमान जी को चोला अर्पित करने से भी शनि की अशुभता कम होती है... वे प्रसन्न होते हैं और जातक कष्टों से मुक्त होता है।


इसके अलावा कुछ अन्य उपाय भी हैं जिन्हें आपको शनि की वक्री अवस्था की स्थिति में करना चाहिए जैसे शनि मंत्र का जाप, प्रत्येक शनिवार शनि देव की पूजा करना, गरीबों और असहाय व्यक्तियों की सहायता करना, अनाथ बच्चों को भोजन करवाएं, जानवरों को चारा खिलाएं, शनि का दान करें।

शनि मंत्र

ऊँ प्रां प्रीं प्रौं स: शनैश्चराय नम:


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